दूर कहीं उस पार 

Jyoti

​जब दूर कहीं उस पार दरिया के

सपनो के महल संवर जाएंगे

इस पार इंतज़ार में

मेरी कश्ती बिखर जाएगी।
जब दूर कही उस पार अंधेरे में

जुगनू चमचमाएँगे

इस पार इंतज़ार में

मेरी आँखों की रोशनी पिघल जाएगी।
जब दूर कहीं उस पार आसमानों पर

खुशियाँ नज़र आएंगी

इस पार इंतज़ार में

मेरे पंख बिखर जाएंगे।
जब दूर कही उस पर सपने मेरे

हकीक़त होते नज़र आयेंगे

इस पार इंतज़ार में

मेरी आँखें खामोश हो जायेंगी।

– Jyoti Yadav

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कुछ इश़्क किया, कुछ काम किया- पीयूष मिश्रा. For people who think Hindi is Cliche.

A famous poem by very acclaimed and loved poet,composer actor and writer Piyush Mishra, carried forward in verses of the same flow.